पुरुष बांझपन (Male Infertility)

निःसंतानता या बाँझपन को लेकर समाज में कई तरह के भ्रम है।  समाज हमेशा महिलाओ को गर्भधारण करने में असमर्थता के लिए दोषी ठहरता है।  जबकि विश्व स्वस्थ संगठन (WHO) के अनुसार सामान्य आबादी में बांझपन की मौजूदगी  15 – 20 % है। जिनमे पुरुष बांझपन कारणों का योगदान  30 – 40% हैं।

बदलती जीवनशैली के कारण वर्तमान में पुरुष बाँझपन की दर बढ़ती जा रही है।  इसे कई कारण है।  लेकिन समय के साथ इनके इलाज भी संभव है।

पुरुष बाँझपन के लक्षण

लौ स्पर्म काउंट – कई बार शुक्राणु की संख्या में कमी होने के कारन महिलाओ को गर्भधारण करने मे समस्या आ सकती है।  इसे “ओलिगोस्पर्मिस ”  कहते है।

जन्मजात असमान्यताए  – इनमे कुछ समस्याए पुरुषो में जन्म से ही मौजूद होती है।  जैसे – वास डेफेरेंस की जन्म से ही अनुपस्थित होना , इस स्थिति में टूयूब की अनुपस्थित होती है।  जिसके कारण अंडकोष से शुक्राणु बाहर नहीं निकल पते है। इसके अलावा टेस्टीज पेट से स्क्रोटम में नहीं पहुंच पते है , इसे ” क्रिप्टोरचिडिजम ” कहते है।

एंडोक्राइन डिसऑर्डर्स – कई बार  शरीर के विकास में मदद करने वाले हार्मोन को प्रेरित करने वाली ग्रंथि जैसे – पिट्यूटरी , थायरॉइड , एंड्रीनल आदि की खराबी से भी बांझपन की समस्या हो सकती है। 

आनुवंशिक असामान्यता – क्रोमोसोम में किसी तरह का परिवर्तन शुक्राणु के उत्पादन या शुक्राणु के प्रवाह में रुकावट पैदा करता है।

शुक्राणु की गतिशीलता – शुक्राणु की गतिशीलता में काम होने पर भी शुक्राणु अंडे को निषेचित (फर्टीलिज़ेड) नहीं कर पाते है।
संक्रमण – यदि पुरुषो के प्रजनन अंग में किसी भी प्रकार के संक्रमण होने पर भी बांझपन की समस्या हो सकती हैं। इस स्थिति में शुक्राणु बनने में बाधा उत्पन्न हो सकती है।
कैंसर – पुरुषो में किसी भी प्रकार का कैंसर होने पर प्रजनन हार्मोन स्त्रावित करने वाली ग्रंथिया भी प्रभावित होती है।

इन सभी के अलावा भी कुछ कारण और है। जैसे –

  • शराब के अत्यधिक सेवन के कारण टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन के स्तर में कमी आ जाती है जिससे शुक्राणु की क्वालिटी, संख्या और गतिशीलता में हो जाती है।
  • इसके अलावा अत्यधिक धूम्रपान , तनाव , मोटापे ,शुगर आदि के कारण भी शुक्राणु की क्वालिटी, संख्या और गतिशीलता में हो जाती है।
  • कई बार देखा गया हैं औद्योगिक रसायन , X – रेस रेडिएशन आदि के कारण भी प्रजनन अंग प्रभावित होते हैं और इनफर्टिलिटी की समस्या होती है।
  • शरीर मैं बहुत सारी ट्यूब होती है जो कि शुक्राणु को एक जगह से दूसरी जगह ले जाने का काम करती है, कई बार कुछ कारणों जैसे – चोट लगने, संक्रमण की वज़ह से ये ट्यूब बंद हो सकती है, जिस कारण से टेस्टिकल सुख जाते हैं |
  • कई बार लंबे समय तक एनाबोलिक स्टेरॉयड, कैंसर की दवाएं या फिर एंटी – फन्गल की दवाई के कारण भी पुरषों मे फर्टिलिटी घट सकती हैं |

पुरुष बाँझपन का इलाज –

पुरुषों मे बांझपन के इलाज की कई पध्दतिया मौजूद हैं |

  • पुरुष बाँझपन के वर्तमान मे कई इलाज उपलब्ध है लेकिन यह बीमारी की गंभीरता और समयावधि पर निर्भर करते है। परन्तु इन सभी से पहलेडॉक्टर उन सभी कारको से दूर रहने की सलाह देते है जिनके कारण इनफर्टिलिटी की समस्या होता है।
  • इसके अलावा कुछ तकनीक के द्वारा भी संतान प्राप्त कर सकते है जैसे –
  • IUI (इंट्रा यूटेराइन इनसेमिनेशन ) – यदि शुक्राणु की संख्या सामान्य से काम होने पर IUI तकनीक के द्वारा संतान प्राप्त कर सकते है।
  • यदि किसी कारण से शुक्राणु टेस्टिस से बाहर नहीं निकल पाते है तब उस स्थिति में TESA या PESA तकनीक से शुक्राणु को बाहर निकल के IVF – ICSI प्रक्रिया द्वारा भी संतान प्राप्त की जा सकती है।
  • यदि प्रजनन अंगो में किसी भी तरह का संक्रमण होने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श करे।
  • वर्तमान में शुक्राणु को फ्रीज़ किया जा सकता है जैसे – कैंसर होने पर कीमोथेरेपी से पहले शुक्राणु को फ्रीज़ किया जा सकता है ताकि बाद में भी संतान प्राप्त की जा सके।

पुरुष बाँझपन का पता लगाने के लिए की जाने वाली जांचे –

पुरुषों में बांझपन की समस्या कई कारणों से हो सकती है, इसके लिए कुछ जांचे कि जाती है जिनसे इनका कारण पता लगाया जा सकता हैं|

  • वीर्य की जांच – इस जांच के द्वारा शुक्राणु की संख्या , गुणवत्ता और गतिशीलता का पता चलता है।
  • हार्मोन्स की जांच – प्रजनन में मदद करने वाले हार्मोन को प्रेरित करने वाली ग्रंथि जैसे – पिट्यूटरी , थायरॉइड , एंड्रीनल , हाइपोथेलेमस
    आदि की खराबी से भी बांझपन की समस्या हो सकती है। ब्लड टेस्ट के जरिये इन हॉर्मोन्स के स्तर को मापा जा सकता है।
  • स्क्रोटल सोनोग्राफी – इस जांच में अंडकोष और सहायक कोशिकाओं की संरचना में किसी प्रकार की कमी होने पर पता चल जाता है।
  • जेनेटिक टेस्ट – इस जांच से पता चलता है की किसी किसी प्रकार का क्रोमोसोमल सिंड्रोम तो महि है जैसे – क्लाइनफेलटर सिंड्रोम , सिस्टिक फाइब्रोसिस जीन म्युटेशन , Y क्रोमोजोम माइक्रो डिलीशन आदि
  • टेस्टिकुलर बायोप्सी – इस के द्वारा पता किया जा सकता के की शुक्राणु का उत्पादन सामान्य हो रहा है या नहीं।

पुरुष बांझपन से बचाव –

पुरुषों में बांझपन से कुछ हद तक बचा जा सकता हैं | जैसे –

* धूम्रपान ना करें |

* शराब का सेवन ना करे |

* किसी भी तरह के नशीले पदार्थो के सेवन से दूर रहे |

* वजन को संतुलित रखे |

* शुगर पर नियंत्रण रखे |

* टेस्टिकल्स पर लम्बे समय तक गर्मी पैदा करने वाली चीजों को दूर रखे |

* कीटनाशक और अन्य विषैले पदार्थों से दूर रहे |

* पोष्टिक आहार ले और भोजन मे Vit E, C, D उपयोग ज्यादा करे क्यों कि यह प्रजनन क्षमता को बढ़ाने मे मदद करते हैं |

इन कुछ तरीकों से बांझपन की समस्या से कुछ हद तक बचा जा सकता हैं |

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